‘अरविन्द मार्क्सवादी अध्ययन संस्थान’ के बारे में जानें
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तीसरी अरविन्द स्मृति संगोष्ठी, 22-24 जुलाई 2011 : भारत में जनवादी अधिकार आन्दोलन…
June 30th, 2011
तीसरी अरविन्द स्मृति संगोष्ठी 22-23-24 जुलाई को लखनऊ (उ.प्र.) में आयोजित है। इस वर्ष संगोष्ठी का विषय है ‘भारत में जनवादी अधिकार आन्दोलन: दिशा, समस्याएँ और चुनौतियाँ’। संगोष्ठी भारत में जनवादी अधिकार और नागरिक स्वतन्त्रता आन्दोलन की दशा-दिशा, समस्याओं, चुनौतियों और सम्भावनाओं पर केन्द्रित होगी। कृपया इस संगोष्ठी में भागीदारी के लिए हमारा आमन्त्रण स्वीकार [...]
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भूमण्डलीकरण के दौर में मजदूर वर्ग के आन्दोलन और प्रतिरोध के नये रूप और रणनीतियाँ
August 17th, 2010
1. प्रस्तावना भारतीय और साथ ही अन्तरराष्ट्रीय मजदूर आन्दोलन आज एक गम्भीर संकट का शिकार है। यह अब किसी विवाद का विषय नहीं है कि सोवियत संघ में 1953 में और विशेषकर चीन में 1976 में मजदूर सत्ताओं के पतन के बाद से, पूँजी की शक्ति श्रम की शक्ति पर हावी रही है। यह [...]
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विश्व पूँजीवाद की संरचना एवं कार्यप्रणाली में बदलाव तथा भारत का मजदूर आन्दोलन : क्रान्तिकारी पुनरुत्थान की चुनौतियाँ
August 17th, 2010
आज जिसे पूँजी का भूमण्डलीकरण कहा जा रहा है, वह मूलत: साम्राज्यवाद का ही एक नया दौर है। पूँजी की बुनियादी गति के नियम वही हैं, लेकिन उसकी कार्य-प्रणाली में कई अहम और बुनियादी बदलाव आये हैं। कार्य-प्रणाली का यही बदलाव हमें बाधय कर रहा है कि हम मजदूर आन्दोलन की नयी रणनीति और [...]
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भारत का मजदूर आन्दोलन और कम्युनिस्ट आन्दोलन
August 17th, 2010
अतीत के सबक, वर्तमान समय की सम्भावनाएँ तथा चुनौतियाँ ”इतिहास अपने लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में मनुष्य की गतिविधि के सिवा कुछ नहीं है।” – कार्ल मार्क्स, पवित्र परिवार द्वितीय अरविन्द स्मृति संगोष्ठी में उपस्थित साथियो, जब मनुष्य अपने लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में प्रयत्न करता है तो इस प्रक्रिया में अतीत के प्रयोगों की [...]
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मजदूर आन्दोलन की नयी दिशा : सम्भावनाएँ, समस्याएँ और चुनौतियाँ
August 17th, 2010
इतिहास इस बात का गवाह है कि मजदूर आन्दोलन दुनिया में कहीं भी, ठहराव को तोड़कर लम्बी छलाँग ले पाने में और नयी ऊँचाइयों को छू पाने में तभी सफल हुआ है, जब उसने अपने अन्दर की विजातीय प्रवृत्तियों से, तमाम गैरसर्वहारा लाइनों से निर्मम, समझौताहीन संघर्ष किया है। जब ठहराव का दौर होता है [...]
